LODH KSHATRIYA

Announcement:

This is a Testing Annocement. I don't have Much to Say. This is a Place for a Short Product Annocement

Wednesday, 8 July 2015

सन्त कबीर के दोहे

 सन्त कबीर के दोहे 


कबीर  दास  जी  के  दोहो  को  आप  जानते  होंगे  उन्होंने  अपने  दोहो  के  माध्यम  से  मनुष्य  जीवन  को 

सरल  शब्दों  में  दर्शाया  है,  इनके  दोहो  से  हम  प्रेरणा  लेकर  हमारा  जीवन  सरल  बना  सकते  है,

और  जीवन  आने  वाली  प्रतिएक  बाधा और  समस्या  का  समाधान  कर  सकते है,  




१ 





जाति न पूछो साधु की, पूछ लीजिये ज्ञान,
मोल करो तलवार का, पड़ा रहन दो म्यान। 


 



निंदक नियरे राखिए, ऑंगन कुटी छवाय,
बिन पानी, साबुन बिना, निर्मल करे सुभाय। 


 
                   
 
"पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोय,
ढाई अक्षर प्रेम  का, पढ़े सो पंडित होय।"

 



 
 बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय,
जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोय।


१० 


११ 


कबीरा खड़ा बाज़ार में, मांगे सबकी खैर,
ना काहू से दोस्ती,न काहू से बैर.
१२ 

शिव ही शव है


शिव ही  शव है 
और 
शव  ही  शिव है 





शिव  और  शव  में  सिर्फ  एक  "इ"  की  "मात्रा"  का  अंतर  है,

 अगर  "शिव"  में  से  "इ"  की  "मात्रा"  को  हटा  दो  तो  वो  "शव"  कहलाती  है,

  ठीक  उसी  प्रकार  जबतक  हमारा  जीवन  है,  तबतक  इस  जीवन  को  प्रभु  भक्ति  में  लगाने  से  हमे  जीवन  जीने 

की  सही  दिशा  मिलती  है,  अगर  किन्तु   विपरीत  हमारे  जीवन  का   कोई  "उद्देश्य"  या   "लक्ष्य"  नहीं  तो  ये  जीवन 
व्यर्थ  है

"शव"  के  समान  है,  हमे  अपने  जीवन  का  सही  सदुपयोग  करके  इसको  जन  कल्याण  में  लगाना  चाहये,  

वरना  ये  शरीर  और आत्मा  कुछ  काम  के  नहीं,  जो  जन्म  लेगा  उसका  मरना  भी  निशित  है,  

मरने  के  बाद  वैसे  तो  ये  शरीर  "शव"  ही  हो  जाएगा  तो

इसे  "शव"  होने  से  पहले  "शिव"  को  प्राप्त  करादो,  


Friday, 3 July 2015

Netaji Subash Chandra Bose

नेताजी सुबाष चन्द्र बोस 




स्वतंत्रता के प्रमुख सेनानी नेता जी सुभाषचन्द्र बोस भारतिय स्वतंत्रता संग्राम में एक बोहत महत्वपूर्ण व्यक्ति थे,सुभाषचन्द्र बोस भारतीय इतिहास के ऐसे युग पुरुष हैं जिन्होंने आजादी की लड़ाई को एक नया मोड़ दिया था. उनका एकमात्र उद्देशय अपने देश की स्वतंत्रता थी,उन्होंने आजाद हिंद फौज का गठन कर अंग्रेजों के छक्के छुड़ा दिए थे.
नेताजी को ब्रिटीश सरकार (British  Government ) द्वारा कई बार बंधी बनाया गया था,
वे भारतीय नेशनल कांग्रेस पार्टी के बोहत सक्रिय कार्य करता थे,  भारत की आज़ादी के लिए  उनेह 
अंतर्राष्ट्रीय समर्थन चाहिए था, इसिलए उनोहने अलग अलग समय पर मुसोलिनी, और हिटलर से मुलाकात की,
विश्व युद्ध 2 . के समय में वह ब्रिटिश सेना के खिलाफ थे, जापान, इटली और जर्मनी के नेताओं से भी बैठक की,
उनोहने जापान के पास जाकर इंडियन नेशनल आर्मी का गठन किया, पर
यह अभियान विफल रहा, मगर उनकी आत्मा को तोड़ने के लिए ये पर्याप्त नहीं था , जो चलो दिल्ली को शुरू करदिया
और जैहिंद का नारा जो सुबाष चन्द्र बोस द्वारा दिया गया था, आज भी गूँज रहा है !
उन्होंने कहा था, “स्वतंत्रता संग्राम के मेरे साथियों! स्वतंत्रता बलिदान चाहती है. आप ने आजादी के लिए बहुत त्याग किए हैं, किंतु अपनी जान की आहुति अभी बाकी है. मैं आप सबसे एक चीज मांगता हूं और वह है खून. दुश्मन ने हमारा जो खून बहाया है, उसका बदला सिर्फ खून से ही चुकाया जा सकता है. इसलिए तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हे आजादी दूंगा. इस प्रतिज्ञा-पत्र पर साधारण स्याही से हस्ताक्षर नहीं करने हैं. वे आगे आएं जिनकी नसों में भारतीयता का सच्चा खून बहता हो. जिसे अपने प्राणों का मोह अपने देश की आजादी से ज्यादा न हो और जो आजादी के लिए सर्वस्व त्याग करने के लिए तैयार हो.
सुभाष चन्द्र ने सशस्त्र क्रान्ति द्वारा भारत को स्वतंत्र कराने के उद्देश्य से 21 अक्टूबर, 1943 को ‘आजाद हिन्द सरकार’ की स्थापना की तथा ‘आजाद हिन्द फौज’ का गठन किया. इस संगठन के प्रतीक चिह्न एक झंडे पर दहाड़ते हुए बाघ का चित्र बना होता था.

आजाद हिंद फौज या इंडियन नेशनल आर्मी की स्थापना वर्ष 1942 में हुई थी. कदम-कदम बढाए जा, खुशी के गीत गाए जा – इस संगठन का वह गीत था, जिसे गुनगुना कर संगठन के सेनानी जोश और उत्साह से भर उठते थे.

आजाद हिंद फौज के कारण भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त हुई. इस फौज में न केवल अलग-अलग सम्प्रदाय के सेनानी शामिल थे, बल्कि इसमें महिलाओं का रेजिमेंट भी था.

Param Aatma


हम सबमे परमात्मा का अंश  है 
इसीलिए हम आत्मा है और वो परमात्मा है 






Thursday, 2 July 2015

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Wednesday, 1 July 2015

Shri Rajiv Dixit


स्वदेशी चिकिस्ता 



राजीव भाई जी ने  कई किताबें लिखी है, और व्याख्यान भी दिया है, अधिकांश किताबें इलेक्ट्रॉनिक्स मीडिया 
(CD,SD Card's ,) के रूप में विब्भिन ट्रस्टो द्वारा प्रकाशित किया गया है,

About Rajiv Dixit

श्री राजीव भाई 


     

राजीव दीक्षित जी एक भारतीय सामाजिक कार्यकर्ता थे।उन्होंने स्वदेशी आंदोलन,आजादीबचाओ आंदोलन,और विभिन्न अन्य कार्यों के माध्यम से भारतीय राष्ट्रीय हित के विषयोंपर जागरूकता फैलाने के लिए सामाजिक आंदोलनों शुरू किया था।[1]उन्होंने भारत स्वाभिमान आंदोलन के राष्ट्रीय सचिव के रूप में कार्य किया था।[2]उन्होंने केवल भारतीय मूल के उत्पादों के उपयोग के लिए लोगो में जागरुक्ता और मज़बूत विश्वास जगाया।[3]उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय आर्थिक नीतियों में भारतीय इतिहास और मुद्दों के बारे मेंजागरूकता फैलाना भी ज़रूरी हैराजीव दीक्षित का जन्म भारत के नाह गांव अलीगढ़,उत्तर प्रदेश,में हुआ था।उनकी स्कूली शिक्षा प्रणाली गांव मेंबारहवीं कक्षा तक हुई।[5]उन्होंने एम.टेक M Tech किया था और एक संक्षिप्त अवधि के लिए वैज्ञानिक के रूप में काम किया था।राजीव दिक्षित जी का जन्म 30 नवमबर 1967 में अलीगढ के नाह गांव उत्तर प्रदेशमें हुआ था,उनोहोने गांव के स्कूल से 12.वि कक्षा तक शिक्षा प्राप्त की M.techभी किया था और कुछ समय तकव्यग्यनिक के रूप में काम किया।वह स्वदेशी में विश्ववास रकते थे,उनोहने स्वदेशीआंदोलन और आज़ादी बचाओ आंदोलन पहल की,राजीव भाई जी के नेतृतव में नई दिल्ली में स्वदेशी जागरण मंच में 50000 से भी अधिक लोगों की रैली को संबोदित किया गया,राजीव भाई हमेशा सच ही बोलते थे,उनोहने सरल तरीके से बड़ी बड़ी बीमारियों का इलाज किस तरह हमारे घर में यूज़ होने वालीचीजो से बताया है,इनकी अॉडिपो और वीडियो CD'S मार्किट में उपलब्द है,राजीव भाई जी के बारे में जितना भी लिखो वो कम है,मेरी नज़र में वो माँ भारती के सच्चे सपूत है जय हिन्द जय माँ भारती

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